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CHALO GAV KI OR - चलो गाँव की ओर - Ekal Geet

 CHALO GAV KI OR - चलो गाँव की ओर

Genre: Ekal
Language: Hindi





स्वावलंबी स्वाभिमानी भाव जगाना है
चलो गाँव की ओर हमें फिर वैभव लाना है 

हर घर में गौ माँ की सेवा पशुधन का हो पालन
दूध, दहीं, घी, मठ्ठा, लस्सी हर घर में हो सेवन

बने औषधि पंचगव्य से खाद और इंधन गोबर से
स्वच्छ रहेंगे स्वस्थ रहेंगे भाव जगाना है

गौ पालन से खुशहाली हर घर में लाना है...स्वावलंबी स्वाभिमानी
गांव में होगी जैविक खेती जमीं के नीचे पानी

अनाज, सब्जी, फूल और फल से सजेगी धरती सारी
कोई न होगा भूखा प्यासा पुरी होगी सब की आशा
 
स्नेह और सहकारिता का भाव जगाना है
कृषि आधारित समृद्धि हमें गाँव में लाना है...स्वावलंबी स्वाभिमानी

ग्रामोद्योग विस्तार से सबका निश्चित हो रोजगार
जियें सादगी से सब रखें मन में उच्च विचार

गाँव का हर बच्चा हो शिक्षित हर युवा संस्कारित निर्भीक
भारतमाता की जय हो यह भाव जगाना है

राम राज्य के सपने को साकार करना है...स्वावलंबी स्वाभिमानी
ग्राम नगर वन के सब वासी भारत की संतान

एक संस्कृति एक धर्म है पुरखे सब के सामान
ऊच नीच का भेद भुलाकर कंधे से कंधा मिलाकर

समरसता का गीत गाकर कदम बढ़ाना है
इस हेतु से तन मन धन जीवन लगाना है...स्वावलंबी स्वाभिमानी
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